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Tuesday, December 28, 2021
Be proud of your Wounds
Be proud of your Wounds...
For every wound there is a scar, and every scar is having a story...
Be your own story...be your own book...
Be the writer of your Story
©Abhishekism
Saturday, July 24, 2021
कंपार्टमेंट एग्जाम
जय गुरुदेव ❤️
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
अर्थात, गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूँ।
वेदों में कहा गया है कि माता पिता से बड़ा कोई नहीं, सबसे पहले गुरु भी माता पिता ही होते हैं।
मेरे जीवन में भी यह स्थान मेरे पिता जी का है।
पहली बार ज़िंदगी में फेल होने का स्वाद (कंपार्टमेंट) 10वीं के बोर्ड की परीक्षा में चखा।
केंद्रीय विद्यालय दीपाटोली कैंट रांची के 30 साल के इतिहास में (1979 में के वी दीपाटोली कैंट की स्थापना हुई थी) कोई भी बच्चा मैथ्स की कंपार्टमेंट पास नही कर पाया था। यूं तो मैं पढ़ाई में अच्छा था,पर आर सी ए के लिए क्रिकेट खेलने का भूत मुझे ले डूबा था।
ज्यादातर वक्त क्रिकेट की प्रैक्टिस में ही गुजरता था और शायद इसी वजह से पढ़ाई भी बाधित हुई थी।
320 विद्यार्थियों में से 240 बच्चों की मैथ्स में कंपार्टमेंट आई थी, उसमें से हम भी एक थे।
बोर्ड के रिजल्ट्स आते ही जिनके अच्छे अंक आए थे, उनमें खुशी का माहौल था और हम जैसों की ज़िंदगी मातम में बदल गई थी।
उस वक्त बाबूजी ने कहा,कोई बात नहीं,जो पढ़ेगा वही तो पास या फैल होगा,जो कोशिश करेगा, उसी की जीत और हार होगी।अभी कंपार्टमेंट एग्जाम में बैठने का मौका है, अपनी पूरी मेहनत करो, पास हो जाओगे।
तभी डैडी के दोस्त और हमारे फिजिक्स टीचर पाठक सर का कॉल लैंडलाईन पर आया, उनकी बेटी प्रियंका जो की मेरी सहपाठी थी,उसका भी मैथ्स में कंपार्टमेंट आया था, उन्होंने कहा मुश्किल है बच्चों का पास होना।आज तक तो इस स्कूल के 30 वर्षों के इतिहास में कोई मैथ्स की कंपार्टमेंट और इंग्लिश की कंपार्टमेंट पास नहीं हुआ।
मैंने डरते डरते अपने पिताजी को कहा कि मैं मैथ्स की कंपार्टमेंट पास करूंगा।
रांची में दीपाटोली में मैथ्स के बेस्ट टीचर सी बी सिंह सर से ट्यूशन की बात की गई।
अब मसला यह था की सीबी सिंह सर दीपाटोली से भी आगे रहते थे,तो सैनिक थिएटर रांची से वहां जाने का साधन सिर्फ़ ट्रैक्स या ट्रेकर जीप थी।
फैसला यह हुआ कि रोज़ ट्यूशन के लिए अकेले ट्रैक्स/जीप पकड़ के वहां ट्यूशन पढ़ने अकेले जाया जाएगा।
रोज लगभग 10 किम जाना, ट्यूशन पढ़ना और वापिस आना,लगभग 2-3 महीने यही सिलसिला चला, बहुत मेहनत की, अंततः परीक्षा का दिन आया और सेंटर पढ़ा K.V. हेहल रांची (KV CCL) पाठक सर स्कूल बस में साथ थे, लगभग 6 स्कूल बस गई थी साथ में। लगभग 260 विद्यार्थी थे अलग अलग विषयों में अनुतीर्ण हुए हुऐ, कंपार्टमेंट आई थी जिनकी।
एग्जाम देने गए, मेरे परम मित्र सुमित, जिसकी इंग्लिश में कंपार्टमेंट थी, उसकी सीट मेरे साथ आई।
मैंने जल्दी जल्दी अपना मैथ्स का पेपर सॉल्व किया और सुमित को इंग्लिश के आंसर्स क्वेश्चन पेपर में लिख के बताने लगा, इंविजिलेटर ने 3-4 बार वार्निंग दी,और फिर मेरा मैथ्स का पेपर ले लिए, मैं बेफिक्र था, क्यों की मैं अपना काम कर चुका था,और सुमित का भी काफ़ी पेपर हल करवा दिया था।
ख़ैर एग्जाम दे के बाहर आए, काफ़ी स्टूडेंट्स के मुंह लटके हुए थे,कह रहे थे की पेपर बहुत टफ था, आउट ऑफ सिलेबस था, पाठक सर ने मुझसे पूछा
कैसा हुआ पेपर, मैंने कहा ठीक हुआ, पास हो जाऊंगा, उन्होंने हंसते हुए कहा, पास... हूह ... सिर्फ मेरी बेटी प्रियंका होगी, वैसे भी आज तक कोई पास हुआ है के वी दीपाटोली से मैथ्स और इंग्लिश के कंपार्टमेंट में।और सुना है बड़ा दूसरों को अंग्रेज़ी के पेपर में उत्तर बता रहे थे। पहले ख़ुद तो पास हो जाओ।
ख़ैर परिक्षा परिणाम (रिज़ल्ट) का दिन भी आ गया। पूरे स्कूल में सिर्फ़ मैथ्स में एक ही विद्यार्थी उतीर्ण हुआ था वोह था Abhishek Tiwariz और इंग्लिश में कुछ बच्चे उतीर्ण हुए थे, उनमें से एक था मेरा परम मित्र सुमित।
आज सुमित कहां है,पता नहीं, प्रियंका ने अगले वर्ष परीक्षा उतीर्ण की, आज वो एक बड़े MNC पर अच्छे पद पर कार्यरत है।
मैं आज 5 मास्टर्स और पीजी डिप्लोमा,4 सनातक डिग्री, 5 सर्टिफिकेशन कर के MES में शेफ (खानसामा) के पद पर कार्यरत हूं साथ ही साथ Ph.D कर रहा हूं लीगल स्टडीज में।
यह डैडी/पापा/पिताजी ही हैं, जिन्होंने एलएलबी करने के लिए प्रेरित किया,
एलएलएम करने के लिए प्रेरित किया और अब डॉक्टरेट करने के लिए सपोर्ट और सहयोग करते है ❤️
मेरे पहले गुरु, जिनकी असीम अनुकम्पा और सानिध्य में 5 -6 वर्ष की आयु में काव्य लेखन, लेखनी की शुरुआत हुई, यह बाबूजी ही हैं, जिनकी वजह ने नई ऊर्जा और संभावनाओं को तलाशता रहता हूं,यह बाबूजी ही हैं, जो नित नव सृजन की ओर अग्रसित करते हैं।
आज जो कुछ भी बन पाया हूं, अपने बाबूजी, अपने गुरुजनों की बदौलत ही बन पाया हूं, निर्भीक, निडर, असंभव को संभव करने का साहस, बाबूजी और अपने सभी गुरु जनों की प्रेरणा से संभव करने का प्रयास रहता है।
जीवन संग्राम है, हमें रोज़ परिस्थितियों से लड़ना है, स्वयं से, स्वयं की असीमित संभावनाओं से लड़ना है, यह सिर्फ़ हमें एक गुरु ही सिखा सकता है। गुरु का स्थान कोई भी , कभी भी नहीं ले सकता
ईश्वर सभी गुरु जनों को अच्छी सेहत प्रदान करे, सभी के मान प्रतिष्ठा में वृद्धि करे।
जय गुरुदेव ❤️
Thursday, July 8, 2021
Saturday, November 28, 2020
नए रास्ते ईजाद करने में माहिर शायरा : रेणु नय्यर
अल्बर्ट आइंस्टीन, स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स, मार्क जुकरबर्ग, सरोजिनी नायडू, मदर टेरेसा, अमृता प्रीतम, दीपा मेहता, कल्पना चावला, ये चंद नाम हैं जिन्होंने अपने नज़रिए से दुनियां को और भी अधिक खूबसूरत बना दिया, हमारे बीच ऐसा ही एक और नाम है आदरणीय रेणु नय्यर जी का, जिन्होंने ना सिर्फ़ ऊर्दू गज़लों की दुनियां में एक आला मुकाम हासिल किया, बल्कि अपनी नई सोच से कई नई लड़कियों, बच्चियों, महिलाओं के लिखने और मंच पर पहुंचने के सपने को और भी सशक्त स्वरूप प्रदान किया है।
अक्सर दुनियां में लोग पहले , नई चीज़, बदलाव का विरोध करते हैं,बाद में सब उसी को अपनाने लग जाते हैं। छायावाद की शुरुआत भी जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा जी ने की,और अंततः छायावाद के प्रमुख स्तंभ बन गए।
जैसे देश में कंप्यूटर आने का और आधुनिक मशीनों का विरोध हुआ और फिर सभी को जब उनकी अहमियत पता चली तो सभी ने इसे अज़माया और अपनाया, वैसे ही जैसे नये विचार सुकरात और कार्ल मार्क्स ने दिए। रेणु नय्यर जी यकीनन अदब और सुखनवरी की दुनियां में अपनी नई सोच और नये नज़रिए के लिए जानी जाती हैं और इस बार तो सोने पे सुहागा ये है की आपने अपनी बहर ईजाद की है।
हम कौन हैं, क्या हैं,यह मायने नहीं रखता, मायने रखता है तो सिर्फ़ कि हम कौन सा काम, किस मंशा से कर रहे हैं।
आप भी दशरथ मांझी की तरह एक नया आयाम स्थापित कर रही हैं, आने वाले वक्त में दुनियां आपकी इस बहर को यकीनन आपके नाम से ही जानेगी। आपको आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं, आप यूं ही सफ़लता के नए आयाम स्थापित करती रहें।
पेश ए ख़िदमत है रेणु नय्यर साहिबा की गज़ल
तुम जो चुपचाप ख़यालों में आ के बैठ गए
ख़ुद ब ख़ुद अश्क़ रुमालों में आ के बैठ गए
تم جو چپ چاپ خیالوں میں آ کے بیٹھ گے
خود بہ خود اشک رومالوں میں آ کے بیٹھ گئے
हम ने हर बार इन्हीं से शिफ़ाएँ हासिल कीं
आप के ग़म जो मिसालों में आ के बैठ गए
ہم نے ہر بار انہیں سے شفأیں حاصل کیں
آپ کے غم جو مثالوں میں آ کے بیٹھ گئے
मुतमईनी तो जवाबों का मुक़द्दर न बनी
रंज कितने ही सवालों में आ के बैठ गए
مطمئینی تو جوابوں کا مقدّر نہ بنی
رنج کتنے ہی سوالوں میں آ کے بیٹھ گئے
लुत्फ़ देने जो लगी थी हमें ये तन्हाई
हिज्र ख़ुद अपने विसालों में आ के बैठ गए
لطف دینے جو لگی تھے ہمیں یہ تنہائی
ہجر خود اپنے وصالوں میں آ کے بیٹھ گئے
रंग जब से मेरे साये ने अपना बदला है
सब अंधेरे भी उजालों में आ के बैठ गए
رنگ جب سے میرے سآئے نے اپنا بدلہ ہے
سب اندھیرے بھی اجالوں میں آ کے بیٹھ گئے
जिन के हमराह बने थे कभी तुम्हारे कदम
वो सफ़र पाँव के छालों में आ के बैठ गए
جن کے ہمراہ بنے تھے کبھی تمھارے قدم
وہ سفر پاؤں کے چھالوں میں آ کے بیٹھ گئے
बर-सरे-राह तमाशा हमारा जब भी बना
आप भी देखने वालों में आ के बैठ गए
بر سر راہ تماشا ہمارا جب بھی بنا
آپ بھی دیکھنے والوں میں آ کے بیٹھ گئے
- Renu Nayyar
(Article by Abhishek Tiwari)
Tuesday, September 29, 2020
ना निराश ना हताश, सुखी जीवन का प्रयास
बहुत दुख देता है सपनों का टूटना और उस से भी बुरा होता है सपनों के साथ - साथ अपने हौसले का टूटना और अपनों का हम से रूठना और उनका हमसे साथ छूटना। कुछ लोगों के सपने जब टूट जाते हैं, उनके अपने उनसे रूठ जाते हैं और उनके हाथ और साथ छूट जाते हैं तो वो अपनी ज़िन्दगी से दूर चले जाते हैं। ज़िन्दगी में उम्मीदों का मरना बहुत ही बुरा होता है, वो वक़्त जहां आप अकेले होते हैं और बार बार यादों के महासागर में गोते लगाते हैं।
आपके हृदय में और मन मस्तिष्क में चलता हुआ अन्तर्द्वन्द आपको चैन से जीने नहीं देता और चैन से मरने भी तो नहीं देता है। परिस्थितियों से हार के, विवश होने वालों को उनकी मंज़िल कभी नहीं मिलती, उनको मिलती है तो सिर्फ़ अकाल मृत्यु और जो अभी विफलताओं, असफलताओं से निराशा के वक़्त अपनी भावनाओं पे काबू कर लेते हैं, उनकी विजयश्री तो फ़िर निश्चित है।
बहुत ज़रूरी है दुनियां में अपनी भावनाओं पे काबू करना, अपनी इन्द्रियों को जीतना। अपनी खुशियों की चाभी को दूसरों के हाथों में सौंपने वाले सदैव निराश हताश होते हैं।कभी - कभी आपको अपने स्वप्नों का बलिदान देना पड़ता है क्योंकि सृष्टि ने, आपके लिए शायद उस से भी बड़े स्वप्न देखें हैं। वैसे भी कहते हैं मन का हो तो भला और मन का ना हो तो बहुत ही भला।
अपनी जीत अपनी हार, अपनी खुशियां अपने दुख, अपने जीवन का विष और अपने जीवन का अमृत सब आपके ही हाथ है। ज्ञानी मनुष्य खुशियों की अनुभूति अपने अंतर्मन में अवस्थित ब्रह्मांड में ही ढूंढ़ लेता है, उसको भौतिक सुख की आवशयकता नहीं होती है। वहीं अज्ञानी मृग के समान खुशियों और सुख की कस्तूरी अपने अंदर ढूंढने की बजाय बाहरी दुनियां में ढूंढ़ता है।
औरों के द्वारा निर्धारित सुख - दुःख, सफलता - असफलता के पैमाने के अनुसार वो सिर्फ़ और सिर्फ़ दुखों को ही प्राप्त करता है।
विजय और हार सिर्फ़ एक मनःस्थिति होती है।
आप जो भी कार्य कर रहे हैं अगर उसको करने से किसी को भी कोई कष्ट होता है तो आप कभी भी सुख को प्राप्त नहीं कर सकते, क्योंकि आपको सुख भी मिल गया तो वह क्षणभंगुर ही होगा, वहीं सतत् परिश्रम से, कठिन परिश्रम से प्राप्त सुख आपके जीवन में आपको जो सुख और खुशियां देता है, उसकी अनुभूति में आप का जीवन कब व्यतीत हो जाता है आपको पता ही नहीं चलता।
दूसरों को ख़ुश देखना और दुनियां को ख़ुश रखना ही आपके जीवन का आधार होना चाहिए।
युग- काल खंड और ये दुनियां सिर्फ़ उसी को याद रखती है जो त्याग करते हैं। अपनी खुशियों का त्याग, अपने धन का त्याग, अपने क्रोध और अहंकार का त्याग, अपने जीवन का त्याग।
त्याग ही जीवन का आधार होना चाहिए,जो ख़ुशी किसी मायूस, ज़रूरत मंद, अपने या पराए के चेहरे पे हंसी लाने से मिलती है वो ख़ुशी शायद आपको किसी और कार्य करने से नहीं मिल सकती।
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Tuesday, August 4, 2020
मुझे क्या फ़र्क पड़ता है
नई शिक्षा नीति
Sunday, August 2, 2020
नपुंसक
Tuesday, July 7, 2020
1 सितंबर 1958 को चांदपुर बिजनौर उत्तर प्रदेश (भारत) में जनाब हस्मतुल्लाह जी के घर जन्में शकील जमाली साहब आज पूरी अदब की दुनियां के शकील जमाली साहब बन चुके हैं, या यूं कहा जाये की हिंदुस्तान का बेटा पूरी अदब की दुनियां का सबसे पसंदीदा शायरों की फ़ेहरिस्त का एक बुलंद नाम बन चुका है, एक बहुत ही बड़ा हस्ताक्षर बन चुका है तो यह बात सौ फ़ीसदी सच ही साबित होगी।
शकील जमाली साहब अपने अशआर को जिन अल्फ़ाज़ में पिरोते हैं उनके मायने गज़ब की गहराई रखते हैं।आपकी सादगी में जो बात है, वह दुनियां में अक्सर बहुत कम लोगों में मिलती है, जितनी पाक रूह, उतने ही बेमिसाल इंसान।
यक़ीनन आप अपने आप में अदब और सुखनवरी की यूनिवर्सिटी, विश्व विद्यालय हैं। अदब की दुनियां में अक्सर लोग अपनी बात करते हैं, वहीं एक आप हैं जो हमेशा ही बड़े शायरों की बात करते हैं, अपने से बड़ों को याद करते हैं, अपने समकालीन शायरों और अपने से उम्र में कम शायरों की इज्ज़त अफजाई करते हैं।
आप हमेशा बड़े शायरों, पुराने शायरों के साथ साथ आज के दौर के जो बेहतरीन शायर हैं, उन्हें पढ़ने के लिए सभी को प्रोत्साहित करते हैं।
आप अक्सर कहते हैं कि शायर वही याद रहता है जो ज़मानों और वक़्त से ऊपर की बात करता है. कमज़ोर शायरी ही जुमलों की मोहताज होती है। किसी भी क़ामयाब महफ़िल के लिए मेज़बान,शायर और सामईन बराबरी के हक़दार होते हैं।
क्या लिखना है, क्या नहीं लिखना है, कैसे आगे बढ़ना है,आप बेहद सादगी और बेहतरीन तरीक़े से सभी नौजवानों को समझाते हैं। वक़्त के साथ चलना, टेक्नोलोजी के साथ चलने पर भी आप ज़ोर देते हैं। लगातार पढ़ना और पढ़ते रहने पर आपका खासा ज़ोर रहता है। जब भी ख़ाली वक़्त मिलता है आपको, उसमें भी आप पढ़ते ही रहते हैं।
धूप तेज़ है,कटोरे में चांद, कागज़ पर आसमान । दुनियां में उर्दू में गज़लों की शायद ही कोई ऐसी पत्रिका हो जिसमें आपकी गज़ल ना छपी हो, शायद ही हिंदुस्तान का कोई बड़ा अदबी मंच हो या शहर हो जहां आपकी गजलों ने धूम ना मचाई हो।
इंटरनेट, यूट्यूब पे अगर किसी शायर को सबसे ज्यादा मोहब्बत हासिल है,तो यक़ीनन यहां भी आप ही बाज़ी मारते दिखते हैं।
सुखनवरी को, शायरी को, अदब को सबसे पहले पायदान पर रखने वाले आप और अपने जज़्बे को लाखों सलाम हैं।
©Abhishek Tiwari
*
अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए
©शकील जमाली
अश्क पीने के लिए ख़ाक उड़ाने के लिए
अब मिरे पास ख़ज़ाना है लुटाने के लिए
मेरे किरदार को चुन अपने निशाने के लिए
कौन सा शहर उजाड़ोगे बसाने के लिए
अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए
मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए
माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए
घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए
*
सफ़र से लौट जाना चाहता है
शकील जमाली
परिंदा आशियाना चाहता है
ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
जो दो पैसे कमाना चाहता है
वो पागल ज़हर खाना चाहता है
समुंदर सूख जाना चाहता है
सुना है हज को जाना चाहता है
*
अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था
शकील जमाली
तो फिर तुझे ज़रा पहले बताना चाहिए था
मगर तुझे भी ज़रा सा निभाना चाहिए था
तो फिर चराग़ हवा में जलाना चाहिए था
ये इश्तिहार गली में लगाना चाहिए था
वहाँ वक़ार नहीं सर बचाना चाहिए था
ये उम्र वो थी कि खाना कमाना चाहिए था
*
वफ़ादारों पे आफ़त आ रही है
शकील जमाली
मियाँ ले लो जो क़ीमत आ रही है
मुझे इस बार ग़ैरत आ रही है
मुझे उस पर मोहब्बत आ रही है
कहानी में सदाक़त आ रही है
मिरे आड़े मोहब्बत आ रही है
वो देखो एक औरत आ रही है
बिछड़ जाने की साअ'त आ रही है
नसीहत पर नसीहत आ रही है
Wednesday, July 1, 2020
आधुनिक भारत के सबसे पसंदीदा शायरों में से एक - वरूण आनंद
आसान नहीं होता दोस्तो किसी के जीवन का आनंद बन जाना और उस से भी मुश्किल होता है एक ऐसा आनंद बन जाना, जो की ना सिर्फ़ एक परिवार का मान सम्मान है, अपितु पूरे पंजाब प्रांत और भारतवर्ष को जिस पे गर्व है।
वह ना सिर्फ़ एक दिये की तरह जलता है, परन्तु वह ख़ुद जल के पूरी दुनियां को सूरज की तरह रौशन करता है। यहां बात हो रही है आज के दौर के सबसे ख़ास शायर की; जो अव्वल फ़ेहरिस्त के शायरों में से एक चमकता नाम है, जिनका नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है; वह हैं हर दिल अजीज वरूण आनंद साहब । आज के दौर में हर एक नया उभरता लेखक, कवि या शायर अगर किसी शायर की तरह बनना चाहता है तो यकीनन वरूण आनन्द साहब के जैसा बनना चाहता है और बने भी क्यों ना, कठोर परिश्रम, सच्ची लगन, जिंदादिली, ईमानदारी, मोहब्बत और इंसानियत का दूसरा नाम है वरूण आनंद।
भारत के सूबा ए पंजाब के लुधियाना ज़िले से ताल्लुक़ रखने वाले
वरूण आनंद साहब एकदम सहज प्रवृत्ति के हैं। आज देश के लगभग सभी मंचों पे आप अपनी शेर ओ शायरी का जादू चला चुके हैं और आगे भी चलाते रहेंगे।आप जिस भी मंच पर विराजमान होते हैं, उस मंच की शोभा स्वतः ही बढ़ जाती है। शायद ही कोई ऐसा शख़्स होगा,जिसने आपकी गजलें सुनी हो और आपके जादू से अछूता रहा हो। आपकी शायरी का जादू भी कुछ ऐसा है कि आप के चाहने वालों की फ़ेहरिस्त दिन - प्रतिदिन और भी बड़ी होती जा रही है, बॉलीवुड से ले कर देश विदेश में आप के नाम की दीवानगी देखते ही बनती है।
आपका नाम अपने आप में किसी भी मुशायरे और कवि सम्मेलन की सफ़लता की कुंजी है। आपके कलाम और क़लम का जादू भी कुछ ऐसा है कि भीड़ सिर्फ़ आपका नाम सुन के आने लगती है।यह एक दिन की मेहनत का नतीजा नहीं है, इसमें कई वर्षों की तपस्या है, आपकी मेहनत और लगन है,आपकी और आपके परिवार की असंख्य कुर्बानियां शामिल हैं, आपके गुरुजनों, प्रियजनों, चाहने वालों और कई अन्य लोगों की दुआओं का असर है इसमें।
जब दुनियां के अधिकतर लोग आराम फरमाने में व्यस्त रहते हैं तब आप रोज़ी रोटी कमाने के बाद, दिन भर की मरूफियत में अपनी सुखनवरी के लिए जहन में ग़ज़लों, शेर ओ शायरी पर काम कर रहे होते हैं। ख़ाली वक़्त में आप दूसरे शायरों को पढ़ने और लिखने में मसरूफ़ होते हैं। जहां इस दौर में हर एक में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है, वहीं आप नये शायरों को आगे बढ़ाने और सुखनवरी की बारीकियां समझाने में मसरूफ होते हैं।
आप दूसरे कई लोगों के लिए मिसाल हैं की कैसे औरों को आगे बढ़ाने के साथ साथ ख़ुद भी आगे बढ़ा जा सकता है।
अपने पारिवारिक मूल्यों का, जीवन मूल्यों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करने वाले आप, यक़ीनन आधुनिक युग के शायरों में एक बेहतरीन नाम हैं।
दोस्तों Poetic Atma परिवार Varun anand जी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है,और वरूण आनंद जी के चाहने वालों के लिए उनकी लिखी गजलें पेश करता है। सभी गजलें इंटरनेट और वरूण आनंद जी के फ़ेसबुक वॉल से ढूंढ के इकठ्ठी की गई हैं, ताकि वरूण आनंद जी को चाहने वाले आपकी बेहतरीन गजलों, शेर ओ शायरी को पढ़ सकें।
अगर इस लेख में आपको कोई त्रुटि दिखे तो कृप्या क्षमा करें।
© अभिषेक तिवारी (पोएटिक आत्मा)
अपनी आंखों में भर कर ले जाने हैं
मुझको उसके आंसू काम में लाने है
देखो हम कोई वेहसी नहीं, दीवाने हैं
तुमसे बटन खुलवाने नहीं लगवाने है
हम तुम एक दूजे की सीढ़ी है जाना
बाकी दुनिया तो सांपों के खाने हैं
पाक़ीज़ा चीजों को पाक़ीज़ा लिखो
मत लिखो उसकी आंखें मयखाने हैं
*
तेरी निगाह-ए-नाज से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएं क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त
हैरत हैं पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आपके चूमे हुए दरख़्त
*
तेरे पीछे होगी दुनिया, पागल बन
क्या बोला मैंने कुछ समझा?.. पागल बन
सेहरा में भी ढूंढ ले दरिया, पागल बन
वरना मर जाएगा प्यासा, पागल बन
आधा दाना आधा पागल, नहीं नहीं नहीं
उसको पाना है तो पूरा पागल बन
दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नही
पागल खाना है ये दुनिया, पागल बन
देखें तुझको लोग तो पागल हो जाएँ
इतना उम्दा इतना आला पागल बन
लोगों से डर लगता है? तो घर में बैठ
जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
*
चाँद, सितारे, फूल, परिंदे ,शाम ,सवेरा एक तरफ़
सारी दुनिया उसका चर्बा उसका चेहरा एक तरफ़
वो लड़ कर भी सो जाए तो उसका माथा चूमूँ मैं
उससे मुहब्बत एक तरफ़ है उससे झगड़ा एक तरफ़
जिस शय पर वो उँगली रख दे उसको वो दिलवानी है
उसकी ख़ुशियाँ सबसे अव्वल सस्ता महंगा एक तरफ़
ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उसके हाथों से
चारा-साज़ी एक तरफ़ है उसका छूना एक तरफ़
सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर-शराबा है
सबका कहना एक तरफ़ है उसका कहना एक तरफ़
उसने सारी दुनिया माँगी मैने उसको माँगा है
उसके सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
*
झीलें क्या हैं?
उसकी आँखें
उम्दा क्या है?
उसका चेहरा
ख़ुश्बू क्या है?
उसकी साँसें
खुशियाँ क्या हैं?
उसका होना
तो ग़म क्या है?
उससे जुदाई
सावन क्या है?
उसका रोना
सर्दी क्या है?
उसकी उदासी
गर्मी क्या है?
उसका ग़ुस्सा
और बहारें?
उसका हँसना
मीठा क्या है?
उसकी बातें
कड़वा क्या है?
मेरी बातें
क्या पढ़ना है?
उसका लिक्खा
क्या सुनना है?
उसकी ग़ज़लें
लब की ख़्वाहिश?
उसका माथा
ज़ख़्म की ख़्वाहिश?
उसका छूना
दिल की ख़्वाहिश?
उसको पाना
दुनिया क्या है?
इक जंगल है
और तुम क्या हो?
पेड़ समझ लो
और वो क्या है?
इक राही है
क्या सोचा है?
उस से मुहब्बत
क्या करते हो?
उससे मुहब्बत
इसके अलावा?
उससे मुहब्बत
मतलब पेशा?
उससे मुहब्बत
उससे मुहब्बत, उससे मुहब्बत, उससे मुहब्बत
*
यूँ अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम
सुलगती रेत पे उँगली से पानी लिख रहे थे हम
मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई
जहाँ पर ज़िंदगानी ज़िंदगानी लिख रहे थे हम
मिले तुझ से तो दुनिया को सुहानी लिख दिया हम ने
वगर्ना कब से उस को बे-मआ'नी लिख रहे थे हम
हमीं पे गिर पड़ी कल रात वो दीवार रो रो कर
कि जिस पे अपने माज़ी की कहानी लिख रहे थे हम
*
ग़ज़ल की चाहतों अशआ'र की जागीर वाले हैं
तुम्हें किस ने कहा है हम बरी तक़दीर वाले हैं
वो जिन को ख़ुद से मतलब है सियासी काम देखें वो
हमारे साथ आएँ जो पराई पैर वाले हैं
वो जिन के पाँव थे आज़ाद पीछे रह गए हैं वो
बहुत आगे निकल आएँ हैं जो ज़ंजीर वाले हैं
हैं खोटी निय्यतें जिन की वो कुछ भी पा नहीं सकते
निशाने क्या लगें उन के जो टेढ़े तीर वाले हैं
तुम्हारी यादें पत्थर बाज़ियाँ करती हैं सीने में
हमारे हाल भी अब हू-ब-हू कश्मीर वाले हैं
*
ये शोख़ियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम
तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम
मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम
रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम
हमारी आँख है पैवस्त एक सहरा में
अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम
हर एक लफ़्ज़ के मा'नी तलाशते हो तुम
हर एक लफ़्ज़ का मा'नी कहाँ से लाएँ हम
चलो बता दें ज़माने को अपने बारे में
कि रोज़ झूटी कहानी कहाँ से लाएँ हम
*
ख़ुद अपने ख़ून में पहले नहाया जाता है
वक़ार ख़ुद नहीं बनता बनाया जाता है
कभी कभी जो परिंदे भी अन-सुना कर दें
तो हाल दिल का शजर को सुनाया जाता है
हमारी प्यास को ज़ंजीर बाँधी जाती है
तुम्हारे वास्ते दरिया बहाया जाता है
नवाज़ता है वो जब भी अज़ीज़ों को अपने
तो सब से बा'द में हम को बुलाया जाता है
हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को
हमीं को बा'द में रास्ता दिखाया जाता है
*
मरहम के नहीं हैं ये तरफ़-दार नमक के
निकले हैं मिरे ज़ख़्म तलबगार नमक के
आया कोई सैलाब कहानी में अचानक
और घुल गए पानी में वो किरदार नमक के
दोनों ही किनारों पे थी बीमारों की मज्लिस
इस पार थे मीठे के तो उस पार नमक के
उस ने ही दिए ज़ख़्म ये गर्दन पे हमारी
फिर उस ने ही पहनाए हमें हार नमक के
कहती थी ग़ज़ल मुझ को है मरहम की ज़रूरत
और देते रहे सब उसे अशआ'र नमक के
जिस सम्त मिला करती थीं ज़ख़्मों की दवाएँ
सुनते हैं कि अब हैं वहाँ बाज़ार नमक के
*
©वरुण आनंद
Saturday, June 13, 2020
वह एक माह बाद आयु के 94 वर्ष पूरा करने वाले थे. उनका निधन नोएडा स्थित उनके आवास पर हुआ.
बीते सात जून को उनकी कोरोनावायरस की जांच रिपोर्ट दोबारा निगेटिव आयी थी जिसके बाद उन्हें घर वापस लाया गया.
उनके बेटे अनूप जुत्शी ने कहा, ‘सात जून को उनकी कोरोनावायरस की जांच रिपोर्ट दोबारा निगेटिव आयी जिसके बाद हम उन्हें घर वापस लाये. आज लगभग दोपहर ढाई बजे हमने खाना खाया और उसके बाद उनका निधन हो गया.’
उन्होंने कहा, ‘वह काफी बूढ़े थे और संक्रमण के कारण काफी कमजोर भी हो गए थे. डॉक्टरों का मानना है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा होगा.
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर लिखा, ‘दिल्ली के मशहूर शायर आनंद मोहन ‘गुलज़ार देहलवी’ जी नहीं रहे. 93 उम्र में भी वो उर्दू अकादमी के हर मुशायरे में जोश और प्रेम से आते रहे. दिल्ली की गंगा जमुनी तहज़ीब की हाज़िर मिसाल को नमन.
शहर में रोज़ उड़ा कर मेरे मरने की ख़बर
जश्न वो रोज़ रक़ीबों का मना देते हैं
स्वतंत्रता सेनानी और जाने-माने ‘इंकलाबी’ कवि देहलवी को कोरोनावायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद एक जून को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
गुलजार देहलवी को भारत सरकार ने पद्मश्री से भी सम्मानित किया है. 2009 में उन्हें मीर तकी मीर पुरस्कार भी दिया गया था. 2011 में उनकी रचना कुलियात-ए-गुल्ज़ार प्रकाशित हुई थी.
पुरानी दिल्ली के गली कश्मीरियां में 1926 में जन्मे देहलवी भारत सरकार द्वारा 1975 में प्रकाशित पहली उर्दू विज्ञान पत्रिका ‘साइंस की दुनिया’ के संपादक भी रह चुके हैं.
गुलज़ार साहब के निधन पर उर्दू अदब के मक़बूल शायर वसीम बरेलवी और मंसूर उस्मानी ने अपने अनुभव साझा किए-
- उर्दू अदब और हिंदुस्तान की साझा संस्कृति का एक वाहक आज रुख़्सत हो गया। मेरी करीबी उनसे दिल्ली के हिंदू कॉलेज में नौकरी के दिनों बढ़ी थी। पुरानी दिल्ली के इलाकों में उनके साथ पूरा एक क़ाफ़िला रहता था। शायरी के मंच पर मेरे संघर्ष के दिनों में मुझे उनका बहुत साथ मिला। हमेशा हौसला अफ़जाई की। उनका जाना केवल एक भाषा ही नहीं, बल्कि हमारी तहजीबी विरासत का बड़ा नुकसान है। दिल्ली की रवायतों को जीने वाले शायर का नाम था गुलजार देहलवी।
- प्रो. वसीम बरेलवी, शायर
- जिगर मुरादाबादी से उनके अच्छे ताल्लुकत थे। मुरादाबाद में अपनी जवानी के दिनों से करीब 65 वर्ष की आयु तक तो यहां के मुशायरों में खूब आना हुआ। उसके बाद उम्र के तकाजे को देखते हुए कुछ कम हुआ। 2018 में मुरादाबाद में आयोजित जिगर फेस्ट में वह शिरकत करने आए थे। उस वक्त जिगर साहब के उनके नाम लिखे खतों को उन्होंने यहां दिखाया था। एक जीती-जागती पाठशाला ने आज हमसे विदाई ले ली। मुझे उनका बहुत आशीर्वाद मिला।
- मंसूर उस्मानी, प्रसिद्ध शायर
Monday, June 1, 2020
अभिषेक तिवारी ने पोएटिक आत्मा के माध्यम से सर्वाधिक ई-लिटफेस्ट की मेजबानी करके बनाया कीर्तिमान
अभिषेक तिवारी ने पोएटिक आत्मा के माध्यम से सर्वाधिक ई-लिटफेस्ट की मेजबानी करके बनाया कीर्तिमान
Wednesday, May 27, 2020
Socho kya kar sakte the,kya kar sakte hain
Ek aur majdoor palayan karne pe majboor hain,whain kuch dino mein middle class logon ki aatmhatya ki khabar aane ki ghatna badh jayegi,chori,lootmaari,cheena jhapti,dakeiti ki khabar aani shuru ho jayegi(kuch jagah se toh shuru bhi ho gayi hai),par humko kya.hum toh charas laga ke sarkaar pe sab kuch thop ke so jayeinge,kyun ki hum toh tax de ke so jate hain iss bharose ki jo karegi sarkar karegi.
Gaanv gaanv mein jaa ke dekho jahan apne ghar aur aas pados ki saaf safai humko swayam karni padti hai,aapsi bhai chahra banaye rakhna padhta hai.shahar mein ek din Municipality ki gaadi naa aaye toh kachre ka ambaar lag jaata hai ghar mein.
Kaarn hum swayam hain,apni jadon se door humne shahar ke talaab,koodaghar,khaali jungle swayam katwa diye.pashchaat sabhyata mein itna rang gaye hain ki roz ek aam ghar se 5-10 kg kachra nikalna aam baat ho gaya hai.
Jahan hamein ab bhi sarthak baatein karni chahiye thi,wahan hum tera dharm chota,mera mazhab bada karne mein lage hain.
Jahan bahas honi chahiye ki Corona kaal ke baad kaise rozi rozgaar ko patri pe laayein,hum sab apne apne rajyon ki sarkaron,kendra sarkar pe sab chor chaar ke baith gaye hain.Kyun jab hum party karte hain,fizoolkharchi karte hain tab sarkaar se poochte hain ? jab hum kamre ki batti khuli chod jaate hain,paani behta hua chod dete hain,sarkaar ya logon ki parwaah karte hain ?
Lock down shayad badhe,ya purntaah khul jaaye...corona rahe ya na rahe,bas ek sawaal khud se karte rahiyega...main desh ke liye kya kar raha hun,maine desh ke liye kya kiya hai,main desh ke liye kya karna chahta hun...aur main Manvta,insaniyat,aman chain ke liye kya kar sakta tha,kya karna chahta hun,kya kar rakah hun,aur kya karunga.
©Abhishekism ©ekchotasakavi ©lekhakHunBhaiAurNahiBhi
Thursday, April 30, 2020
Legends Never Dies
Maine bhi keh diya irfan bhai,usi dinn lunga jiss din apko apna autograph dene layak ho jaunga...aur apne muskurate hue kaha tha "miyaan Zindgi mein bahut door tak jaaoge" maine bhi keh diya "Inshaallah bhai,Allah Talha ne Chaha toh zaroor".
Woh mauka jo mila milne ka, beshaq 4-5 minute ki Mulaqat mein bahut batein ho gayi,jaise pichle saal Irshad Kamil Sahab se Vivek Agnihotri sahab se aur Anand L Rai Untitled sahab se hui,thi toh chhoti si mulaqaat...par Aaj aap khel gaye...
Kaha tha mujhe ki bhai bahut door tak jaoge,par aap khud bahut door chale gaye...ummid hai,wahan aapko koi dard na mile,pyaari ammi ki god mein sir rakh ke jab aap jannat se neeche zameen pe dekhoge toh hum sabko rota hua paaoge... Aap Asliyat ke #ShaanEHindustaan hain,the aur raheinge
Tuesday, February 25, 2020
My life,My Motivation
The day when I realized what I am capable of,I changed the rules of the game for myself and turned the table. Earlier I use to compete with others and after the realization I started competing with myself...from a Looser to where I am standing today,I am pretty satisfied by my growth as a human as I am learning new things every day and not only that,I am passing my knowledge,my skills to others,so that they can also grow in thier own life.I know I still have very bad English though I am 8777 pointer in IELTS...
8.5 in Listening,
7.5-8 in Reading,
8 in Writing and
8.5 Bands in speaking...
Still I give all the credit to the Practice.
As they say Practice makes perfect...
And the mantra is...
Keep on doing till U succeed.
© Abhishekism
Wednesday, October 2, 2019
भौतिकतावाद के युग में प्रेम भी महज़ भोग विलास की वस्तु बन के रह गया है। कहां हमें यह सिखाया जाता था कि प्रेम सिर्फ़ एक बार होता है,सभी से प्रेम करो और आज कहां हमें गीतों के नाम पे दारू, बंदूक, लड़कियां परोसी जा रही हैं और शायद सरकारें, सेंसर बोर्ड, एन जी ओ, सामाजिक संगठन भी स सो गए लगते हैं, सोएं भी क्यूं ना,क्यूं की सभी हाथी जो हो गए या बन गए हैं, जिनके दांत खाने के कुछ और, दिखाने के कुछ और।
इस से भी ज्यादा दुःख उन माता पिता को देख के होता है जो छोटे छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल फ़ोन पकड़ा देते हैं बिना परवाह किए की बच्चा क्या देख रहा है या कर रहा है और इसी कारण से सुनने में आता है कि आठ वर्ष के बालक ने छह वर्ष की बच्ची का बलात्कार किया,या महज़ १३-१४ वर्ष की आयु में बालिका गर्भवती हुई । मुझे पता है मेरे इस लेख से शायद समाज में कुछ नहीं बदलेगा, परन्तु इंसान को इंसान, आदमी को आदमी, मनुष्य को मनुष्य समझना तो हम बचपन से अपने बच्चों को सीखा ही सकते हैं, इतना ही नहीं, हम उन्हें बचपन से सही गलत का बोध तो करा ही सकते हैं।
#सोचिएगाज़रूर #abhishekism #इक्छोटासाकवि
Friday, September 27, 2019
Monday, September 23, 2019
एस आर हरनोट जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जहां हिमाचल की नवोदित कवियित्रियों के साथ साथ वरिष्ठ कवियित्रियों ने भी भाग लिया।
जिसमें हिमालय साहित्य मंच से स्नेह नेगी जी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में मह्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यहां एस आर हरनोट जी ने बाबा भालखु जी का जीवन परिचय सभी से करवाया और नारी शक्ति पे स्वरचित २ कविताएं सुनाई, तत्पश्चात वरिष्ठ कवियित्री स्नेह नेगी जी ने पर्यावरण पे लिखी अपनी कविता से सबका मन मोह लिया,तान्या, कीर्ति शर्मा, इशा, अंजलि शर्मा, किरण शर्मा, शाक्षी भोटका, वंदना गुप्ता जी ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
अभिषेक तिवारी ने हिमाचल के विश्व प्रसिद्ध लेखक एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष एस आर हरनोट जी का जीवन परिचय सभी के समक्ष प्रस्तुत किया
Thursday, September 19, 2019
धीमी मौत
हां धीमी मौत, सुन के भी एक डर का एहसास होता है ना
? की मौत हो तो एक झटके में हो जाए और दर्द भी ना हो,वैसे भी कौन चाहता है कि तड़प तड़प के मरे। लेखक और कवि सब कुछ लिखते हैं और कुछ ही ने मौत को बड़ी गहराई से पेश किया है। मैंने भी सोचा कि क्यूं ना एक धीमी मौत इजाद कि जाए और उसका तरीक़ा ऐसा की इंसान तड़प तड़प के जिये और मर भी ना पाए। सिसके, चिखे और चिल्लाए पर मर नहीं पाए। तरीक़ा जान ना नहीं चाहोगे धीमी मौत का...?तरीक़ा ऐसा की रूह भी कांप जाए।
धीमी मौत का तरीक़ा चलो बता ही देता हूं,क्यूं ना एक ऐसे कमरे में बंद कर दिया जाए जहां ढेर सारी रोशनी हो,सभी आधुनिक सुविधाएं,आपके हाथ में मोबाइल फ़ोन हो,चार्जर हो और कभी आता जाता नेटवर्क,पर उस कमरे में आपको बंद कर के ताला लगा दिया गया हो और उस कमरे में कोई चार्जिंग प्वाइंट ना हो। इस से ज्यादा धीमी मौत, दर्दनाक मौत और अंत आज के लोगों के लिए और क्या हो सकती है।
एक ऐसी ही मौत का प्रत्यक्ष गवाह
एक छोटा सा कवि
Abhishekism 💕
Saturday, August 31, 2019
Trendsetters in the Poetic World in North India (2)
Trendsetters in the Poetic World in North India
Let's start from the one who changed the game and ignited this concept.
1. Ashish Dwivedi (Founder and Mentor Soultalk)
Friday, August 30, 2019
Thursday, August 29, 2019
Wednesday, July 4, 2018
Chak De India Dialogues

Sattar minute hain tumhare paas. Shayad ye tumhare zindagi ke sab se khaas sattar minute. Aaj tum aacha khelo ya bura, yeh sattar minute tumhe zindagi bhar yaad rahenge. kaise khelna hai.. aaj mein tumhe nahi bataunga, bas itna kahunga, ki jao aur ye sattar minute jee bhar kar khelo, kyonki iske baad aane wali zindagi chahe kuch sahi ho ya galat, chahe kuch rahe ya na rahe, haaro ya jeeto, lekin ye sattar minute tumse koi nahin chheen saktha, kyunki mein jaantha hu ki aagar ye sattar minute is team ka har player apne zindagi ki sabse badiya hockey khele, to ye satar min khuda bhi tumse vaapas nahin maang sakta!
Jo nahin ho sakt, wahi tho karna hai!
National Womens Hockey na kuch kar payee hai, na kuch kar payengi.
Mujhe states ki naam na sunayie dethe hai, na dhikaie dete hai. Sirf ek mulk-a-naam sunayie detha hai, I-N-D-I-A
Har team mein bas ek hi gunda ho saktha hai, Aur is team ka gunda mein hun!
Vaar karna hai to mardho ki tarah aage se karo… Woh kya hai ki humari team me chakke nahi hote!!
Chandi (Srk referring to his silver medal) Ko Sone Me badlne ki koshish kar rahaa hoon.
Pehli baar kisi ghore ko Bharath ka jhanda leharate hue dekh raha hoon.
Marr jaayenge - par haar ke nahi aayenge!!
Friday, September 1, 2017
3 Idiots Funny Balatkar Dialogues Speech (By Chatur (Silencer) ramalingam)
tripati ji ..maanyaniya shikshagan aur mere piyaaare sahpatiyo …aaj
agar I.C.E aasmaan ki bulaaandiyo ko chhu raahaa hai ..to uska
shreya sirrf ek insaan ko jaata hai Shri Veeru sahastra buddhe
..give him a a big hand ..he is a great guy really you are
Peechle buttis saal se inhone nirantar is college mein balatkar pe
balatkar kiye ………umeed hai aagey bee karte rahege ..hami to
aashcharya hota hai ki ek insaan apne jeevan kaal mein itni balatkar
kaisi kar sakta hai …….…inhone kadi tapaasya se aapne aapko is
kaabil bunaya hai ..waqt ka sahi upyog ghante ka purna istemaal koi
inse seeke ..seeke inse seeke ….
aaj hum sab chaatra yaha hai ..kal desh videsh mein fail jayenge
..waadaa hai aapse jis desh mein honge waha balatkar karenge I.C.E ka
naam roshan karenge …dika [dikha] denge sabko jo balatkar Karne ki
shamtaa yaha ke chaatro mein hai wo sansaar ke kisi chaatro mein
nahiii ….No other chaatra No other chaatra
Adarniya mantraji namashkar aapne is sansthaan ko wo chees di jiski
hamein sakht zaroorat thi …Stan ..stan hota sabi ke paas hai ..sab
chupa ke rakte hai ..detaa koi nai …aapne apna stan is balatkari
purush ke haat mein diya hai…ab dekiye yeh kaisa iska upyog karta hai
Is swarn awsar par ek shlok yaad aa rahe hai……uthmam dadddad
padam..Madhyam padam thuchchuk thuchchuk….kanistham thudthudiya
padam..sud sudi pran katakammm !!! aaaha
































